मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम

पुत्र के रूप में, राजा के रूप में, पति के रूप में राम ने आदर्शों की स्थापना की इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम चंद्र कहा गया। राम चाहते तो पिता को वन गमन के लिए मना कर सकते थे, अपनी लोकप्रियता का सहारा लेकर राजपाट हथिया सकते थे। चाहते तो प्रजा में विरोध […]

रामायण

रामायण का दौर आदर्शों की स्थापना का दौर था, मर्यादाओं की स्थापना का दौर था। पहले बाल्मिकी ने संस्कृत में और फिर महाकवि तुलसीदास ने लोकभाषा में इसे लिखकर जन-जन तक पहुंचाया। आदर्श हमारे मन में हैं इसलिए हम बार-बार इस कथा को देखना और सुनना चाहते हैं। इस दशहरे पर हम लाए हैं रामायण […]