CWG 2018: सिल्वर से लेकर गोल्ड तक का सफरनामा

खेल भावना ही ऐसी होती है कि जीत से खुशी मिलती है और हार से जीतने की हिम्मत।

नई दिल्ली: कौन कहता है कि भारत के बेटे और बेटियों में दम नहीं है। कौन कहता है कि भारत के खिलाड़ियों में पदकों को जीतने की क्षमता नहीं है। इन दोनों या इन जैसों सवालों का जवाब गोल्डकोस्ट में आयोजित 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन से मिल चुका है। साइना की सनसनी,मल्लेश्वरी का पंच विनेश फोगाट का जबरदस्त दांव और मनिका बत्रा के घुमावदार शाट्स लंबे समय तक लोगों के ज़हन में याद रहेंगे। पोडियम पर भारतीय खिलाड़ियों की मौजूदगी, राष्ट्रीय धुन के साथ शान से लहराता हुया तिरंगा गोल्डकोस्ट में मौजूद दुनिया को संदेश दे रही थी कि तीन रंगों से बना तिरंगा यू हीं नहीं शौर्य, शांति और समृद्धि का वाहक है। भारत के लिए गोल्डकोस्ट में वेटलिफ्टिंग में रजत पदक का खाता गुरुराजा ने खोला। लेकिन पदक की चमक को धार दी मीराबाई चानू ने जिन्होंने भारत की झोली में पहला गोल्ड मेडल डाला। भारत को 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य समित कुल 66 पदक मिले।

राष्ट्रमंडल खेलों में ये तीसरा सबसे सफल प्रदर्शन है। राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का सबसे शानदार प्रदर्शन 2010 में था जब 38 स्वर्ण पदकों के साथ भारत ने 101 पदकों को अपनी झोली में डाला। 2014 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल में भारतीय दल ने 15 गोल्ड, 30 रजत और 19 कांस्य पदक समेत कुल 64 पदकों पर अपना कब्जा किया। इससे पहले 2002 में मैनचेस्टर में आयोजित खेलों में 30 स्वर्ण पदक समेत कुल 69 पदक जीते थे।अगर इसे खिलाड़ियों की संख्या और पदकों के रूप में देखें तो कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में कामयाबी की दर 29 फीसद है, जबकि 2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में 28 फीसद और 2010 में 16 फीसद थी।

 

Post Author: VOF Media

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