बैंक के चीफ मैनेजर पर पौने दो करोड़ के गबन का आरोप

खेत को खा गई बाढ़

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नप सकते हैं कई बड़े मगरमच्छ

सौरभ भारद्वाज।।
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के एक चीफ मैनेजर ने ऐसा गोलमाल किया कि जिस शाखा में तैनात था उसी में पौने दो करोड़ रुपए का चूना लगा दिया। यह चोरी 2 साल पहले ही पकड़ में आ जाती लेकिन बैंक मैनेजमेंट के उच्च अधिकारी मैनेजर से अपने कुछ विरोधियों के खिलाफ काम कराने के लिए इतने उतावले थे कि उन्होंने मैनेजर की तमाम गलतियों को देखते हुए भी आंख बंद किए रखी।

VOF Media द्वारा चलाई गई एक स्टोरी सीरीज मर्डर एक बैंक का में हमने सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के जिन घोटालों का पर्दा फाश किया था, उनमें ऐसे भी कई मामले शामिल थे। बैंक के ही इंस्पेक्शन डिपार्टमेंट की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के बाद सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के चीफ मैनेजर शंकरदेव पुरी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने के आदेश दिए जा चुके हैं। लगभग पौने दो करोड़ रुपए की इस धोखाधड़ी के मामले में बैंक की नेवली कलां, हिसार शाखा के सीनियर मैनेजर ने थाना प्रभारी, सदर थाना हिसार को लिखे पत्र में इस धोखा धड़ी का खुलासा किया है और मामला दर्ज कर दोषी को गिरफ्तार करने और रकम की वसूली का अनुरोध किया है। इस मामले कि शिकायत हिसार पुलिस अधीक्षक को भी है। हालांकि एक करोड़ रुपए से ऊपर के गबन के मामलों की जांच ग्रामीण बैंकों में सीबीआई को दिए जाने की परंपरा रही है।

कई सालों से चल रहा था गबन का यह गोरखधंधा

  

गबन का यह गोरखधंधा कई सालों से चल रहा था। वर्ष 2013 में गुड़गांव ग्रामीण बैंक को हरियाणा ग्रामीण बैंक में विलय कर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक का गठन किया गया था। उस समय शंकर देव पुरी इंस्पेक्शन डिपार्टमेंट में चीफ मैनेजर के पद पर तैनात था और मैनेजमेंट ने गुड़गांव ग्रामीण बैंक के उन सैकड़ों कर्मचारियों को इसके द्वारा चार्ज शीट और शो कॉज नोटिस गलत तरीके से दिलवाए जो इस विलय का विरोध कर रहे थे। कुछ हरियाणा ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को भी इस मुहिम में ठिकाने लगाया गया जो प्रबंधन का विरोध कर रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक शंकर देव पुरी पर बैंक प्रबंधन का वरदहस्त रहा है। 2015 में पुरी का ट्रांसफर हेड ऑफिस रोहतक से नेवली कलां किया गया। एक यूनियन लीडर जो बैंक प्रबंधन के घोटालों को लगातार उजागर कर रहा था, उस से परेशान डॉ एम पी सिंह तत्कालीन चेयरमैन और महा प्रबंधक फकीर चंद सिंगला उसे बर्खास्त करना चाहते थे । बैंक प्रबंधन को पुरी के गोरख धंधे ही जानकारी थी, इसलिए पुरी को उस यूनियन लीडर के खिलाफ नकारात्मक जांच रिपोर्ट बनाने के मौखिक निर्देश दिए गए उस समय बैंक की इस शाखा में भयंकर गोलमाल शुरू हो गया था और इसकी जानकारी बैंक प्रबंधन को थी।

बिना रोक-टोक फिर से चलने लगा पुरी का गोरखधंधा

पुरी को जुलाई 2016 में इस ब्रांच से ट्रांसफर कर दिया गया और सुकरात यादव ने यहां वरिष्ठ प्रबंधक के रूप में ज्वॉइन कर लिया था। उसके बाद को पुरी को यूनियन लीडर के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्ट देने के बदले उसी ब्रांच मैं रोक कर एक तरह से पुरस्कृत किया गया और सुकरात यादव को 5 दिन बाद ही हिसार रीजनल ऑफिस में ज्वाइन करा दिया गया। नेवली ब्रांच में एक बार फिर पुरी का गोरखधंधा बिना रोक-टोक फिर से चलने लगा। अगर पुरी का ट्रांसफर उस समय हो जाता तो बैंक में यह पौने दो करोड़ रुपए का घोटाला संभव नहीं था।

इस मामले की जांच रिपोर्ट जुलाई 2017 में तत्कालीन चेयरमैन डॉक्टर एमपी सिंह, महाप्रबंधक वीके सिंह और महाप्रबंधक राजेश गोयल के पास पहुंची। उसके बाद भी इस मामले में कोई एक्शन नहीं लिया गया। विभाग में चर्चा का विषय है कि यह जो पौने दो करोड़ रुपए का घपला बैंक में हुआ उसमें यह सभी अधिकारी शामिल थे। मजेदार बात यह है कि शंकरदेव पूरी खुद बैंक के उन गद्दारों में शामिल हैं जो एनपीए हो चुके हैं शंकरदेव पूरी और उनकी बेटी के नाम लगभग ₹34,00,000 की देनदारी लोन के रूप में बैंक की ओर से बकाया है।

घपला पकड़े जाने के बाद भी सील नही किये खाते

घपला पकड़ा जाने के बाद इस बैंक अधिकारी के बैंक खाते सील हो जाने चाहिए थे लेकिन वरिष्ठ बैंक प्रबंधन के कृपा पात्र होने के कारण इसके बैंक अकाउंट से घपला पकड़े जाने के बाद भी उसके खाते से लगभग 7.50 लाख की बैंक निकासी हुई है जबकि बैंक से रिटायर होने वाले किसी कर्मचारी के नौकरी के आखिरी दिन भी अगर चार्जशीट देते हैं तो उसकी तनख्वाह उसके फंड तुरंत रोक लिए जाते हैं सीज कर दिए जाते हैं।

अगले अंक में बैंक के कुछ और घोटालों की चर्चा करेंगे जो हमारी खबर के बाद प्रकाश में आए और उन पर लगातार कारवाई भी जारी है।

Post Author: VOF Media

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