मांसाहारियों पर भारी पडे दूधवाले

 भारत के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा खिलाड़ियों को ओलंपिक में भेजता है हरियाणा

इस समय जकार्ता में एशियाई खेल-कूद प्रतियोगिता चल रही है। मेडल्स के लिहाज से भारत की स्थिति 9वीं है। मगर इस वास्तविकता के बीच भारत का एक ऐसा राज्य भी है, जो क्षेत्रफल और जनसंख्या दोनों ही हिसाब से छोटा है, मगर वह मेडल के नज़रिये से टॉप पोजीशन बनाया हुआ है।

इसी साल गोल्ड कोस्ट में हुए 21वें कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के नाम 26 गोल्ड मेडल्स रहे, जिनमें से 8 गोल्ड मेडल इसी राज्य के नाम रहे, जिसे अब तक बेहद दकियानुसी और परंपरावादी समझा जाता रहा है। दिलचस्प बात है कि हरियाणा के जिन 8 खिलाड़ियों ने गोल्डमेडल अपने नाम किये, उनमें से दो महिला खिलाड़ी हैं।

विनेश फोगाट ने कुश्ती में गोल्ड मेडल दिलाया,तो मनु भाकर ने शूटिंग में अपना जौहर दिखाया। इन दोनों महिला खिलाड़ियों ने उन गेम्स में अपनी ताक़त दिखायी है,जिन्हें हरियाणा ही क्या, भारतीय परिवेश में भी अबतक पुरुषों की मज़बूत मांसपेशियों से जोड़कर देखा जाता रहा है।

किसने हरियाणा को गेम्स का पावरहाउस बनाया ?

इस समय भारत की कुल जनसंख्या लगभग 126 करोड़ है और ओलंपिक खिलाड़ियों की कुल संख्या 119 है यानि प्रति करोड़ जनसंख्या पर एक खिलाड़ी भी नहीं बैठते, लेकिन हरियाणा को अगर इन आंकड़ों के आईने में देखा जाए, तो चकित करता परिणाम दिखता है।

हरियाणा की जनसंख्या लगभग पौने तीन करोड़ है, यहां से ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या 20 है।यानि प्रति करोड़ आबादी पर तीन खिलाड़ियों की संख्या बैठती है। इस प्रकार खिलाड़ियों की संख्या के लिहाज से हरियाणा, भारत के मुक़ाबले तीन गुना ज़्यादा खिलाड़ियों को ओलंपिक में भेजता है।

हरियाणा की यह ख़ासियत ओलम्पिक से लेकर राष्ट्रमंडल, एशियाई खेल, राष्ट्रीय खेल तक में दिखायी पड़ती है।ऐसे में एक सवाल, जो सभी खेलप्रेमियों के मन में उठता है कि आख़िर हरियाणा में क्या है कि वहां इतने खिलाड़ी पैदा हो रहे हैं और ये हरियाणवी खिलाड़ी राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में कामयाबी की झडी लगा देते हैं? वह कौन सी वजह है, जिसने हरियाणा को गेम्स का पावरहाउस बना दिया है ?

‘पदक लाओ,पद पाओ’ की नीति

हरियाणा की नई खेल नीति के अनुसार ,एशियाई गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को 3 करोड़, रजत पदक विजेता को 1. 5 करोड़ और एशियाई गेम्स में कांस्य पदक विजेता को 75 लाख रुपये दिये जाते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने पर डेढ़ करोड़, रजत पदक के लिए 75 लाख और कांस्य लाने पर  50 लाख रुपए दिये जाने का प्रावधान है। विश्व कप या विश्व चैंपियनशिप के विजेताओं के लिए भी राशि सुनिश्चित की गयी है। इस राशि को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दिया गया है।

हरियाणा सरकार ने नक़द राशि दिये जाने वाली नीति के अलावा एक और नीति अपनायी है और वह है,’पदक लाओ,पद पाओ’ की नीति। चूंकि भारत के अन्य राज्यों की तरह हरियाणा में भी सरकारी नौकरियों की सामाजिक प्रतिष्ठा बहुत ज़्यादा है। यहां के लोग आज भी किसी प्राइवेट नौकरी को सरकारी नौकरियों के सामने थोड़ी नीची निगाहों से देखते हैं।

ऐसे में सरकार की ‘पदक लाओ-पद पाओ’ की नीति एक तरह से खेल और समाज के बीच के रिश्ते को और गहरा बना देता है। इस नीति के ज़रिये हरियाणा सरकार एक तरह से नये समाज का निर्माण भी कर रही है।

मज़बूत होने लगे भ्रूण हत्या के रुकने के आसार

ये ही वो कारण है कि जिस राज्य में लड़कियों की भ्रूण हत्या का अनुपात सबसे ज़्यादा हो, वहां बेटियां मेडल्स ही नहीं ला रही हैं, बल्कि उन खेलों के ज़रिये मेडल्स ला रही हैं, जो अब तक पुरुषों के लिए ही सुरक्षित माने जाते रहे हैं। विभिन्न खेलों में लाये जा रहे मेडल्स, मेडल्स मिलती लाखों-करोड़ों की नक़द राशियां और हासिल होती सरकारी नौकरियों के बूते लड़कियों के जन्म को अभिशाप माने जाने का मिथक भी टूट रहा है। इससे भ्रूण हत्या के रुकने के आसार मज़बूत होने लगे हैं।

दूसरी बात कि मांस-मछलियों से दूर और सामान्य रूप से शाकाहारी माने जाने वाले हरियाणा के खिलाड़ियों ने इस नीति की बदौलत उस वैज्ञानिक संकल्पना को भी ध्वस्त कर दिया है, जिसके तहत माना जाता रहा है कि शाकाहार के वनिस्पत मांसाहार करने वालों की मांसपेशियों में ज़्यादा ताक़त होती है।

खिलाड़ियों के डाइट और उनकी कामयाबी के बीच की धारणा को ये खिलाड़ी नेस्तनाबूद करते दिख रहे हैं। आम तौर पर शाकाहारी माने जाने वाले भारत के इस राज्य ने अहसास करा दिया है कि देसी घी और मज़बूत इरादों के बूते भी मेडल्स की बरसात की जा सकती है।

मगर कोई शक नहीं कि इन तमाम बातों के पीछे हरियाणा सरकार की खेल नीति का गहरा असर है। यह नीति बताती है कि खेल को लेकर अपनायी गयी आर्थिक पहल से अगर खेल की कामयाबी की दास्तान लिखी जा सकती है और सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है,तो विज़न के साथ अपनायी गयी नीतियां हरियाणा की तरह भारत का भी परिदृश्य भी बदल सकती हैं।

(उपेन्द्र चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार)

Post Author: VOF Media

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