प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान’ पर सेमीनार का आयोजन किया

जूनियर रैडक्रास और सैंट जान एंबुलैंस बिगे्रड

राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सराय ख्वाजा की जूनियर रैडक्रास और सैंट जान एंबुलैंस बिगे्रड ने विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति नीलम कौशिक की अघ्यक्षता में से अंग्रेजीे प्रवक्ता, जूनियर रैडक्रास व सैंट जान एंबुलैंस बिगे्रड अघिकारी रविन्द्र कुमार मनचन्दा ने विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस के उपलक्ष्य में ‘प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान’ पर एक सेमीनार का आयोजन किया।

प्राचार्या श्रीमति नीलम कौशिक ने मुख्य अतिथि श्री बी बी क्थूरिया, सचिव जिला रैडक्रास और ईशान कौशिक, जिला प्रशिक्षण अधिकारी व पूर्व प्राचार्य हरीश चन्द धमीजा का स्वागत किया। उन्होनें कहा कि हमारे देश में सडक दुर्धटनाओं, आपदाओं और आपात स्थितियों में जितनी जानें जाती है उन में से सत्तर फीसदी जानें बचाई जा सकती है। विद्यालय के अंग्रेजीे प्रवक्ता रविन्द्र कुमार मनचन्दा नेे बताया कि प्रत्येक छात्र और प्रत्येक व्यक्ति व नागरिक को प्राथमिक चिकित्सा का विस्तृत ज्ञान आवश्यक रुप से होना ही चाहिए ताकि घर या बाहर कहीं भी किसी भी दुर्घटना, आपदा या आपातकालीन स्थिति में जरुरतमन्द व्यक्ति की जान बचाई जा सके।

आपात स्थिति में बचाए जान

मुख्य अतिथि श्री बी बी क्थूरिया ने कहा कि प्राथमिक चिकित्सा जीवन बचाने सम्बन्धी व्यवहारिक तकनीक है जिस का सैंट जान एंबुलैंस द्वारा विश्व भर में इच्छुक लोगों को प्रशिक्षण दिया जाता है युवा पीढी में जागरुकता लाने हेतु में सी पी आर अर्थात कार्डियो पलमनरी रससिटेशन की विघि उस अवस्था में अपनाई जाती है जब रोगी न तो श्वास ले पा रहा हो और न ही ह्रदय कार्य कर रहा हो।

ईशान कौशिक, जिला प्रशिक्षण अधिकारी कृत्रिम श्वास देने से पहले प्राथमिक चिकित्सक के समक्ष तीन स्थितियां हो सकती है:

1. पहली अवस्था में रोगी श्वास ले रहा है और नाडी भी चल रही है इस अवस्था में रोगी को आरामदायक अवस्था में लिटा देते है

2. दूसरी अवस्था में रोगी बेहोश है, श्वास नही ले पा रहा है परन्तु नाडी चल रही है इस स्थिति में दो बार रेसक्यू ब्रीद दे कर प्रति मिन्ट सरकुलेशन चैक करें।

3. तीसरी अवस्था में रोगी न तो श्वास ले पा रहा है और न ही नाडी चल रही है ऐसी अवस्था में रोगी के पास धुटने टिका कर दोनों  हाथ सीधे कर रोगी पर झुक कर एक हाथ की हथेली पर दूसरे हाथ की हथेली रख कर उगंलियां हाथ में  फसा कर 15 बार छाती एक से डेढ् इंच दबाने के बाद दो बार माउथ टु माउथ रेसक्यू ब्रीद दे कर रोगी के श्वास ले पाने तक या रोगी को डाक्टर के पास ले जाने तक यही प्रक्रिया दोहरायेंगे।

जलने के उपचार

जलने के उपचार के बारे में उन्होनें बताया कि जहा तक सम्भव हो जले हुए हिस्से को पानी में डुबो देना चाहिए ताकि पीडा से तुरन्त राहत व आराम मिल सके। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमति नीलम कौशिक ने छात्रों को कहा कि प्राथमिक सहायता का उदेश्य रोगी की यथासम्भव स्वास्थय में वृद्धि करना ने छात्रों को प्राथमिक सहायता के लिए विशेष रुप से प्रयास करने के लिए प्रेरित किया। पूर्व प्राचार्य हरीश चन्द धमीजा रविन्द्र मनचन्दा, रेणु शर्मा, प्रज्ञा, शारदा, रुप किशोर शर्मा, वीरपाल पीलवान, देशराज गोला, ब्रहम्देव यादव ने सभी को इन गुरों को सीखने के लिए कहा।

 

Post Author: Veethika Bhardwaj

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