डीएवीएन स्टार क्लब द्वारा रोल प्ले और शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन

बताया सोशल मीडिया के दुष्परिणाम

डी.ए.वी.शताब्दी कॉलेज के डीएवीएन स्टार क्लब द्वारा अंर्त विभागीय रोल प्ले और शॉर्ट फिल्म मेकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया। इस आयोजन का मुख्य उदेश्य छात्रों के भीतर छिपी प्रतिभा एवं कौशल को सबके सामने लाना था।

कॉलेज प्राचार्य डॉ सतीश आहूजा ने बताया की वर्तमान समय में मानव जीवन पर ’सोशल मीडिया’ का प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसके कई दुष्परिणाम एवं सुपरिणाम हमारी नियमित दिनचर्या में अपनी छाप छोड़ रहे है। इस ज्वलन्त विषय पर समाज को जागरूक करने के उदेश्य से ही रंगमंच और चलचित्र को माध्यम बनाया गया है। छात्रों को इससे रूबरू कराने के लिए ही प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है।

कार्यक्रम संयोजिका सोनिया भटिया ने बताया की कॉलेज के लगभग सभी विभागों से आये 200 विद्यार्थियों ने इसमें रजिस्ट्रेशन कराया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि अमरेंन्द्र सिंह, डिस्क कंप्यूटर एजुकेशन के डायरेक्टर, प्राचार्य डॉ सतीश आहूजा, कोऑर्डिनेटर मुकेश बंसल द्वारा दीप प्रज्जवलन कर किया गया। नितेश अरोड़ा और जी. पी. तिवारी ने भी बतौर अतिथि कार्यक्रम में छात्रों का उत्साहवर्धन किया ।

कॉलेज प्राचार्य डा. सतीश आहूजा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रतियोगिता की औपचारिक शुरूआत की। उन्होनें भावी युवा पीढ़ी को सोशल मीडिया का उचित प्रयोग करने की सलाह दी। वाणिज्य विभाग की पूरी टीम को इस सराहनीय प्रयास के लिए बधाई दी।

आज कल सब कुछ मिलता है सोशल मीडिया पर

इस इवेंट में रोल प्ले में यह सन्देश दिया गया कि कलयुग के इस दौर में सोशल मीडिया का यह सिलसिला कभी थम नही सकता है। आज की युवा पीढ़ी को यह समझना चाहिए कि सोशल मीडिया के अलावा भी दुनिया में बहुत से ऐसे रास्ते और रिश्ते है जिन्हें सहेज कर रखने की आवश्यकता है। और साथ ही यह भी स्वीकार कर लेना चाहिए कि आज कल सब कुछ मिलता है सोशल मीडिया में-प्यार, नफरत,रिश्ते,ज्ञान और धोखा भी।

प्रतियोगिता के मध्य मुख्य निर्णायक गणों के द्वारा तैयार की गई एक शॉर्ट फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। जिसका शीर्षक था- इज़हारे इश्क़ ।  इसमें दो अलग-अलग धर्मों के बीच सोशल मीडिया के माध्यम से पनपे इश्क़ का इज़हार और उसका अंजाम दिखाया गया।

लघु चलचित्र निर्माण प्रतियोगिता में सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं समस्याओं को वायरल करने की प्रथा के बारे में दिखाया गया। समाज को यह सीख देने की कोशिश की गई कि किस प्रकार आज कल के लोग समस्याओं का हल निकालने से पहले उसके प्रचार और प्रसार में मशगुल हो जाते है।

सोशल मीडिया ने पिता- पुत्री के पाक रिश्तो को भी नापाक बना दिया है। ट्विटर के माध्यम से किये गये प्रेम-संवाद ने किस प्रकार पिता और पुत्री को एक शर्मनाक मोड़ पर खड़ा कर दिया । इस बात का बड़ी ही संजीदगी से वर्णन किया गया।

निर्णायक मंडल समिति के रूप में ‘‘ऊटपटांग प्रोडक्शन लिमिटेड’’ के निर्देशक प्रदीप सैनी, उमेश राजपूत और धीरज सूद ने प्रतियोगिता के निष्पक्ष परिणाम निकालने में अपनी अहम् भूमिका निभाई।

विभाग के समन्वयक प्रोफेसर मुकेश बंसल ने अपने सम्बोधन में सोशल मीडिया के मानव जीवन पर पड़ने वाले सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को बताया । युवा पीढ़ी को सदैव सकारात्मक कार्यो एवं विचारों के साथ सोशल मीडिया का प्रयोग करने की सलाह दी।

इस मौके पर विभागाध्यक्ष रवि कुमार, डीन ललिता ढींगरा, डॉ डी पी वैद, डॉ वीरेंदर भशीन, डॉ सुरभि, उर्वशी और कॉलेज के अन्य शिक्षक मौजूद रहे।

Post Author: abha soni

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