बार में बॉबी की जीत से ज्यादा चर्चे तो त्रिखा की हार के हैं

जिला बार असोसिएशन के अध्यक्ष का चुनाव

फरीदाबाद : जिला बार असोसिएशन के चुनाव में अध्यक्ष पद पर विवेेक कुमार (बॉबी रावत) ने विधायक सीमा त्रिखा के पति अश्विनी त्रिखा को पटखनी दे दी है। इस चुनाव के साथ ही फरीदाबाद जिला बार एसोसिएशन की सियासत सदा के लिए बदल गई है। ओम प्रकाश शर्मा और जेपी अधाना के बाद अब संजीव चौधरी नए ध्रुव के रूप में उभरे हैं। पैनल में दो सीटें जीत कर ओपी शर्मा गुट ने अपनी प्रासंगिकता बरकरार रखी है। साथ ही इस इलेक्शन ने भविष्य में फरीदाबाद की राजनीति के बदलने के संकेत भी दिए हैं।

जिला बार एसोसिएशन की नई चुनी गई कार्यकारिणी –

प्रधान – विवेक कुमार (बॉबी रावत)
वरिष्ठ उप प्रधान – टीका डागर
उप प्रधान – वीरेंद्र कुमार भाटी
सचिव – जोगिन्दर नर्वत
अतिरिक्त सचिव – अभिषेक गोस्वामी
संयुक्त सचिव – कुलदीप चंदिला
कोषाध्यक्ष -विक्की भामला
वरिष्ठ कार्यकारी सदस्य – मुकेश कुमार वर्मा
कार्यकारी सदस्य लाइब्रेरी – भीष्म नारायण (निर्विरोध)

जेपी अधाना गुट में दो फाड़

वकीलों के इस चुनाव में शहर की राजनैतिक पार्टियां खुलकर मैदान में उतर आईं थीं। पहली बार पंजाबी लॉयर्स क्लब ने अपने उम्मीदवार के रूप में अश्विनी त्रिखा को मैदान में उतारा था। जिसे जेपी अधाना गुट ने समर्थन की घोषणा की थी, लेकिन यहीं से जेपी अधाना गुट में दो फाड़ हो गए। बार के पूर्व प्रधान संजीव चौधरी ने भी अपना पैनल इस चुनाव में उतारा और बॉबी रावत को प्रधान के रूप में नामांकन भरवाया। इस चुनाव ने न सिर्फ वकीलों की सियासत को सदा के लिए बदल दिया है बल्कि बडख़ल विधानसभा सीट के बदलते राजनीतिक मिजाज की ओर भी इशारा किया है। इस चुनाव को पंजाबी बनाम गुर्जरों के चुनाव के रूप में देखा जा रहा था।

नौसिखिया साबित हुए त्रिखा

चुनाव किन्हीं उद्देश्यों की पूर्ति के लिए लड़ा जाता है। चुनाव लडऩे से पहले उसके न$फे-नुकसान को तोला जाता है। त्रिखा परिवार के पास फिलहाल विधायक पद है ऐसे में श्री त्रिखा को सियासी रूप से यह रिस्क लेने की कोई जरूरत नहीं थी। वकीलों की प्रधानी जीत कर भी कोई खास फायदा नहीं था, लेकिन हार कर अपनी राजनीतिक छवि में एक डेंट श्री त्रिखा ने लगा लिया है। पूर्व मंत्री महेंद्र प्रताप संजीव चौधरी गुट का समर्थन कर रहे थे और किसी भी सूरत में श्री त्रिखा की हार सुनिश्चित करना चाहते थे। जिसमें वह कामयाब हुए। और इस चुनाव परिणाम पर सिर्फ इतना ही कि –

इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ” ऐ बेखबर “
शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।

राजनीति की वकालत या वकालत की राजनीति

Post Author: SAURABH BHARDWAJ

मशहूर पत्रकार सौरभ भारद्वाज पिछले लगभग दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद श्री भारद्वाज अब वीओएफ मीडिया के समूह संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता श्री भारद्वाज अनेक सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़े हैं।

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