स्‍वात (SWAT) से करेंगे सबका स्वागत

दिल्‍ली: स्वात यानि (स्पेशल वैपन्स एंड टैक्टिकस), जो हर प्रकार के खतरे से निपटने में सक्षम होती है। इस टीम खास बात है कि इसमें एक भी पुरुष नहीं है।  इस टीम में नॉर्थ ईस्‍ट से ताल्‍लुक रखने वाली 36 महिलाएं हैं । दिल्ली को पहली महिला स्‍वात (SWAT) टीम की सौगात मिली है। यह टीम अब दिल्ली को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दिल्ली पुलिस इन्‍हें लाल किले और इंडिया गेट पर तैनात करने का मन बना रही है। इनके साथ आतंकी हमले से लड़ने में सक्षम वैन पराक्रम रहेगी।

क्या हैं इस टीम की  खास बातें :

महिला कांस्‍टेबल की ट्रेनिंग विदेश और भारत में मौजूदा उम्‍दा विशेषज्ञों ने की है. ये 15 महीने के सघन प्रशिक्षण के बाद स्‍क्‍वाड में शामिल हुई हैं. यह पुलिस कमिश्‍नर अमूल्‍य पटनायक की विशेषज्ञता की देन है। केवल पश्चिमी देशों में ऐसी फोर्स मौजूद है, लेकिन वहां की स्‍वात टीम में पुरुष और महिला दोनों शामिल होते हैं। ऐसा प्रशिक्षण के तरीके पर निर्भर करता है। इस टीम में अधिकतम लोग  13 असम से हैं और 5 अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और मणिपुर से है. ये एमपी 5 हैं। सब मशीन गनों से लैस हैं और ग्‍लॉक 21 पिस्‍टल रखती हैं।

इनकी तैनाती सेंट्रल और साउथ दिल्‍ली में रणनीतिक ठिकानों पर होगी। इनकी तैनाती महिला फिदाईन के दिल्‍ली पर आतंकी हमला करने के खुफिया इनपुट के आधार पर होगी।

किसी भी आतंकी हमले या मासूम लोगों के बंधक बनाए जाने की घटना से चुटकियों में निपट लेती हैं। आतंकी हमले या बंधक प्रकरण से ये वीरांगना पुरुषों की अपेक्षा ज्‍यादा बेहतर ढंग से निपटती हैं।

ये बहुमंजिला इमारत में आसानी से चढ़ सकती हैं और होटल, बस या मेट्रो में बंधक बनाए जाने की अनहोनी से आसानी से निपट सकती हैं।

भाषाई समझ विकसित करने के लिए नॉर्थ ईस्‍ट से एक इंस्‍ट्रक्‍टर इनके साथ तैनात किया गया है, जो इन्‍हें दिशा-निर्देशों को समझने में मदद करता है।

पुलिस में तैनाती से पहले पुरुष कांस्‍टेबल 12 माह की ट्रेनिंग करते हैं जबकि इन महिलाओं को 15 महीने की ट्रेनिंग दी गई है।

ये जंगल में खोजी अभियान चलाने से लेकर शहरों में होने वाली वारदात से आसानी से निपटने में सक्षम हैं। इन्‍हें आईईडी और अन्‍य विस्‍फोटकों की अच्‍छी जानकारी होती है।

Post Author: VOF Media

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