रितेश रावल फाउंडेशन ने शुरू किया क्रियामूलक शिक्षा अभियान

5 लाख छात्रों के साथ जुड़ने के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम

नई दिल्ली। शिक्षा की दिशा में काम करने वाली संस्था रितेश रावल फाउंडेशन ने राष्ट्रीय स्तर पर क्रियामूलक शिक्षा (लर्निंग बाय डूइंग) अभियान शुरू किया है। समाज के विभिन्न वर्ग के बच्चों की शिक्षा इस संस्था का लक्ष्य है । यह संस्था देश भर के सरकारी स्कूलों के बच्चों को क्रियामूलक शिक्षा का अनुभव प्रदान करना।

अभियान का लक्ष्य है राज्यों के उन दूर-दराज इलाकों तक पहुँच बनाना जहाँ शिक्षा का स्तर अभी भी राष्ट्रीय स्तर से काफी पीछे है। आजकल के समय में स्कूल आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी की ओर बढ़ रहे हैं। कई स्कूलों ने तो शिक्षा के लिए टेबलेट और अन्य स्मार्ट उपकरणों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। वहीं ग्रामीण भारत अभी भी किताबों और ब्लैकबोर्ड पर निर्भर है।

संस्था का उद्देश्य

रितेश रावल फाउंडेशन के संस्थापक रितेश रावल ने कहा, “क्रियामूलक शिक्षा अभियान का उद्देश्य है सिर्फ सुन-पढ़ कर सीखने के बजाय विषय को प्रायोगिक स्तर पर समझना। संगठन का लक्ष्य है स्थानीय सरकार के घटकों के साथ मिलकर इस विचार पर अमल करना । बाद में नीतिगत स्तर प्रभाव डालने का प्रयास करना ताकि मानकीकरण हासिल हो सके।

इनका लक्ष्य है सितम्बर 2019 तक करीब पांच राज्यों तक पहुँच बनाना और 2022 तक भारत के पांच लाख से अधिक छात्रों से जुड़ना। अध्ययन के आधार पर अभियान को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण का लक्ष्य है जागरूकता पैदा करना और स्कूलों में पढ़ाई का मूलभूत माहौल तैयार करना ताकि कियामूलक प्रक्रिया को अपनाया जा सके।
इस किस्म की पढ़ाई का माहौल तैयार करने के उद्देश्य से शिक्षकों के लिए एक क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा । उन्हें यह सिखाया जायेगा की “क्रियामूलक शिक्षा” के लिए माहौल कैसे तैयार किया जाये। हर छात्र को भी क्रियामूलक शिक्षा सम्बन्धी स्टार्टर किट और स्कूल को खेल, संगीत, कला एवं हस्तशिल्प आदि के रूप में नवोन्मेषी तरीके भी मिलेंगे।
इस दूसरे चरण में हर स्कूल में क्रियामूलक शिक्षा का पाठ्यक्रम होगा ताकि वे ढांचागत तरीके से इस अभियान को कायम रख रहे और इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना सकें। इस अभियान की शुरुआत हरियाणा से की है । इसकी वजह है कि जब हम राज्य पर नजर डालते हैं तो स्पष्ट होता है कि यहाँ शहरी और ग्रामीण की बीच बड़ी खाई है।

उन्होनेे कहा कि स्कूलों को क्रियामूलक शिक्षा के लिए माहौल तैयार करने के लिए आधारभूत चीजों की जरुरत है।   इसमें योगदान करने की बहुत गुंजाइश है। इसलिए हमें यहाँ मौका दिखा और हमने यहाँ कोशिश करने और कुछ सफलता की कहानियां गढ़ने की सोची।”

Post Author: abha soni

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