कांवड़ियों के तांडव का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा

दिल्ली:  कावंडियों का उत्पात और तांडव का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। कांवड़ियों के तांडव का मामला सुप्रीम कोर्ट में उठा और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर बात है। कोर्ट ने कहा कि देश में हर हफ्ते दंगे होते हैं इनमें अधिकतर पढ़े लिखे लोग शामिल होते हैं जो देश की  सम्पतिको नुक्सान पहुंचाते हैं

बता दें कि सावन कांवरिये ऐसे बरसे कि उन्होंने जगह-जगह उत्पात मचाया। कहीं कार तोड़ी तो कहीं आपसी रंजिश के चलते लोगों को पीट। इस  सबको देखते हुए जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि इलाहाबाद में नेशनल हाईवे के एक हिस्से को कावंडियों ने बंद कर दिया। सख्त लहजे में जस्टिस चंद्रचूड़ ने ऐसा कांवड़ियों के लिए कहा कि आप अपने घर को जलाकर हीरो बन सकते हैं लेकिन अन्य की संपत्ति को नहीं जला सकते।

प्रदर्शन आदि में कोई लाठी डंडा या हथियार नहीं ले जा सकता

उन्होंने कहा कि हम कानून में बदलाव का इंतजार नहीं करेंगे। हम इस पर कार्रवाई करेंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से एजी वेणुगोपाल ने इसे मंजूर किया। सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि उन सभी कांवड़ियों के खिलाफ कार्रवाई करें जिन्होंने कानून को अपने हाथों में लिया।

कोर्ट ने कहा कि देश हर हफ्ते पढ़े-लिखे लोगों द्वारा दंगे देख रहा है। हमने वीडियो में कांवडियों को कार को पलटते हुए देखा, क्या कारवाई हुई? इतना ही नहीं पदमावत फिल्म को लेकर हंगामा किया गया, फिल्म की हीरोइन की नाक काटने की धमकी दे दी गई, क्या इन सबमें कार्रवाई हुई? हमें जिम्मेदारी तय करनी होगी।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में कोडूंगलौर फिल्म सोसाइटी ने याचिका दाखिल कर कहा है कि जिस तरह से फिल्मों को लोगों व संगठनों द्वारा बैन करने के नाम पर व अन्य धरना प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति से तोड़फोड़ की जाती है उसे रोकने के लिए गाइडलाइन जारी की जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया। याचिका में कहा गया है कि 2009 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर कहा था कि किसी प्रदर्शन आदि में कोई लाठी डंडा या हथियार नहीं ले जा सकता. इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।

Post Author: VOF Media

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