घाटे में थे फिर भी भर दिया 400 करोड़ का इनकम टैक्स

सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक प्रबंधन की एक और करतूत

सौरभ भारद्वाज
चंडीगढ़ : लोगों का तो सुना है कि आर्थिक स्थिति अच्छी न हो तो भी अच्छी सी बैलेंस शीट बनवाकर बैंकों से मोटा लोन पा लेते हैं। अपने कर्जों को छिपाते हैं और अपनी आय को बढ़ा चढ़ा कर पेश करते हैं। लेकिन यहां मामला बैंक का है। सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के प्रबंधन ने अपने हित साधने के लिए पिछले लगभग पांच सालों में बैलेंस शीट में बैंक की कमाई को बढ़ाचढ़ा कर दिखाया जबकि एनपीए हुए लोनों के कारण बैंक का तेल निकला पड़ा था। बैंक बड़े आर्थिक संकट से घिरा था इसके बावजूद कागजों में मुनाफा दिखाया जाता रहा और इस मुनाफे को जायज ठहराते हुए लगभग 400 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स भी सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ने भर दिया।

दरअसल गुडग़ांव ग्रामीण बैंक और हरियाणा ग्रामीण बैंक के विलय से मिलकर बने सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के चेयरमैन प्रवीण जैन, डॉ. एम.पी.सिंह और वर्तमान चेयरमैन ए.के.नंदा ने बैंक की पतली माली हालत की भनक नहीं लगने दी। ताजा आंकड़ों की बात करें तो बैंक लगभग 1700 करोड़ रुपये के नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) के बोझ तले दबा है। इसके बावजूद पिछले 5 सालों में लगभग 400 करोड़ का इनकम टैक्स दे चुके हैं।

एनपीए

2015-16 में एनपीए रहा 328 करोड़ और कुल करोबार रहा 17057.32 करोड़ रुपये
2016-17 में एनपीए रहा 327 करोड़ और कुल करोबार रहा 19602.81 करोड़ रुपये
2017-18 में एनपीए रहा 580 करोड़ और कुल करोबार रहा 22272.95 करोड़ रुपये
सितंबर 2018 में एनपीए रहा 790 करोड़ और कुल करोबार रहा 22948.05 करोड़ रुपये
स्पष्ट है कि 2017-18 के बीच बैंक के एनपीए खातों में तीव्र बढ़ोतरी दर्ज की गई इसके बावजूद बैंक प्रबंधन झूठी वाह-वाही लूटने के चक्कर में और प्रमोशन जैसे अपने निजी फायदों के लिए ऑडिटरों के साथ मिली भगत कर फर्जी आय दिखा कर इनकम टैक्स भरता रहा।
दरअसल एनपीए खातों पर कागजों में ब्याज जोड़ा जाता रहा जबकि असल में बैंक के पास कुछ नहीं आया। आरबीआई के निर्देशों के मुताबिक ऐसे खातों के ब्याज की गणना को डीरिकॉग्नाइज्ड इन्टरेस्ट के तहत रखा जाना चाहिए था और यह बैंक के मुनाफे में नहीं जुड़ता है।

घाटे को मुनाफा दिखाकर अपने हितों को साधा

बैंक के ऑडिट के लिए नियुक्त की गई फर्म पीपी बंसल एंड कंपनी ने बैंक की इन अनियमितताओं को उजागर किया है। साथ ही यह भी बताया कि बैंक प्रबंधन ने किस तरह से घाटे को मुनाफा दिखाकर अपने हितों को साधा है। किसान क्रेडिट कार्ड में एक ही दिन में पैसा जमा हुआ और कुछ ही सेकंड में निकल गया।
ऑडिटर की ओर से जारी की गई पांच आपत्तियों का बैंक प्रबंधन कोई संतोष जनक जबाव नहीं दे सका। ऑडिटर ने उपयुक्त एजेंसी से इस मामले की जांच कराने की भी सिफारिश की है।

इन मुनाफों को दिखाकर बैंक प्रबंधन ने सीएसआर फंड में लूट मचाई और झूठी वाहवाही लूट कर अपनी प्रमोशन्स पाईं। बैंक की नई भर्तियों, पदोन्नतियों आदि में फायदा उठाया। बैंक के द्वारा नियुक्त की गई रिकवरी एजेंसियों का जब ऑडिट हुआ तो लगभग 50 लाख रुपये का ज्यादा कमीशन देने का मामला सामने आया और दोषियों के खिलाफ बैंक प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले की जांच उचित व निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए तो कई बड़े अफसरों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश होगा।
मुकेश कुमार जोशी
चीफ कोऑडिनेटर गुडग़ांव ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन एवं सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गनाइजेशन

Post Author: SAURABH BHARDWAJ

मशहूर पत्रकार सौरभ भारद्वाज पिछले लगभग दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद श्री भारद्वाज अब वीओएफ मीडिया के समूह संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता श्री भारद्वाज अनेक सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़े हैं।

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