हेराफेरी छिपाने के लिए सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ने नहीं कराया ऑडिट

खुली पोल तो बैंक में अफरा-तफरी का माहौल

सौरभ भारद्वाज

चंडीगढ़ । सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक में लूट जारी है। बैंक के अधिकारियों ने ब्याज पर दिए गए रुपये की वसूली बजाय अपने बैंक अधिकारियों से कराने के लिए कई साल पहले रिकवरी एजेंसियों को ठेका दे दिया। अगर बैंक के अधिकारी ही वसूली करते तो यह उनकी ड्यूटी में शामिल होता है। लेकिन अगर रिकवरी एजेंसी को ठेका देते हैं तो उस एजेंसी का कमिशन बैंक निर्धारित करता है। पिछले कई सालों में इन रिकवरी एजेंसियों को कई करोड़ का बेहिसाब भुगतान किया गया। आरबीआई के नियमानुसार इसका हर साल ऑडिट होना चाहिए लेकिन बैंक के तत्कालीन चेयरमैन डॉ. एम.पी.सिंह और जनरल मैनेजर रिकवरी राजेश गोयल ने इन रिकवरी एजेंसियों को हुए भुगतान का कई ऑडिट ही नहीं होने दिया। चेयरमैन के बदलने के बाद नए चेयरमैन ए.के.नंदा ने सभी एजेंसियों को हटा दिया और एनपीए रिकवरी करने के लिए स्टाफ को अलग से इंसेंटिव देना शुरू किया। एजेंसियों को हटाने के बाद बैंक ने उन एजेंसियों को हुए भुगतान का पोस्ट ऑडिट कराना शुरू किया।

आरबीआई की गाइडलाइंस का हो रहा है खुला उल्लंघन

शुरूआती जांच में पाया गया कि इन एजेंसियों को लगभग 50 लाख रुपये अधिक का भुगतान कर दिया गया है। इसके बाद बैंक में अफरातफरी मची। रीजनल दफ्तरों पर इस पैसे की वसूली के लिए दबाव बनाया गया। इस दबाव में रीजनल ऑफिस तमाम कायदे कानूनों को ताक पर रखकर उलजुलूल फैसले कर रहे हैं। जिनसे आरबीआई की गाइडलाइंस का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण है- रीजनल ऑफिस फतेहाबाद। गुजरी 27 फरवरी को टोहाना ब्रांच में कलवान रिकवरी एजेंसी की 3,61,389 रुपये की एफडी तोड़ कर बैंक ने 1,73,598 रुपये वसूल लिए और बकाया रुपये 1,85,000 का भुगतान रिकवरी एजेंसी को दे दिया। जब एजेंसी ने हल्ला मचाया कि मेरी बिना अनुमति के मेरी एफडी तोड़ दी जो कि आरबीआई के नियमों का खुला उल्लंघन है तो बैंक के अधिकारियों ने कर्मचारियों पर दबाव बनाकर अपनी ओर से एजेंसी के खाते में 1, 85,000 रुपये जमा कर दिए।

 

आरबीआई के स्पष्ट दिशा निर्देश हैं कि किसी भी सूरत में चार बजे के बाद कोई भी कैश ट्रांजेक्शन न की जाए। लेकिन बैंक के इन अधिकारी-कर्मचारियों ने रात को 6:42 पर कैश खाते में डाला गया और 6:43 पर यह एंट्री पास की गई। जनरल मैनेजर रिकवरी राजेश गोयल के कार्यकाल में यह सभी हेराफेरियां जारी हैं। पकड़े जाने पर बैंक के छोटे कर्मचारियों पर दबाव बनाकर उनसे पैसे जमा कराए जा रहे हैं। लगातार ऐसे मामलों के प्रकाश में आने के बावजूद खुद को ईमानदार कहने वाले चेयरमैन ए.के.नंदा कोई एक्शन नहीं ले रहे हैं। यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

रिकवरी एजेंसी के संचालक बलवान सिंह नैन के मुताबिक बैंक के अधिकारी अपनी कमियों को छपाने के लिए एजेंसी को बेवजह परेशान कर रहे हैं। जो ऑडिट सालाना होने चाहिए थे वो कराए ही नहीं गए। चार साल का ऑडिट कराया गया। जो कि गलत है। यह एफडी 10 रीजनल ऑफिसों में रहन थी। इसको सभी आरओ से एनओसी लेकर तोडऩा चाहिए था। हमारे बिल बकाया हैं, कुछ आरओ में मैंने जो इन्होंने ज्यादा बताया वह वापस भी किया है। लेकिन इसके बावजूद इन्होंने एफडी तोड़ दी। मैंने इसकी शिकायत ईमेल द्वारा हेडऑफिस को भी की है लेकिन कोई सुनवाई नहीं है।

 

जनरल मैनेजर रिकवरी राजेश गोयल के कार्यकाल में यह सभी हेराफेरियां जारी हैं। सभी कर्मचारी घबराए हुए हैं और चार्जशीटके डर से अपनी जेब से पैसा उन अपराधों के लिए भर रहे हैं जो उन्होंने किए भी नहीं। मैं सीवीओ पीएनबी से मांग करता हूं कि राजेश गोयल के कार्यकाल में वन टाइम सेटलमेंट हुए हैं उनकी उच्च स्तरीय जांच हो बैंक में बहुत बड़ा गोलमाल मिलेगा।

मुकेश जोशी

चीफ कॉडिनेटर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गनाइजेशन एंड गुडग़ांव ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन

 

 

Post Author: SAURABH BHARDWAJ

मशहूर पत्रकार सौरभ भारद्वाज पिछले लगभग दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद श्री भारद्वाज अब वीओएफ मीडिया के समूह संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता श्री भारद्वाज अनेक सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़े हैं।

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