पीएमसी बैंक की राह पर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक

भ्रष्ट प्रबंधन की जांच सीबीआई से कराने की मांग

सौरभ भारद्वाज / चंडीगढ़

श्री मुकेश जोशी (चीफ कॉर्डिनेटर, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स ऑर्गेनाइजेशन एवं गुडग़ांव ग्रामीण बैंक वर्कर्स ऑर्गेनाइजेशन और पदम सिंह तंवर मंत्री व वित्तीय भारतीय मजदूर संघ हरियाणा ने सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की मैनेजमेंट के भ्रष्टाचार व अन्यायपूर्ण नितियों के खिलाफ तय समय सीमा में सी.बी.आई जांच की मांग करते हुए दिल्ली में एक मीटिंग की एवं प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री, नाबार्ड, पी.एन.बी एवं आर.बी.आई को ज्ञापन भेजा!
सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की मैनेजमेंट सब नियमों को तोडऩे के लिए बेलगाम, कोई एक्शन लेने को तैयार नहीं।
पिछले कुछ समय से सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की मैनेजमेंट पी.एन.बी के प्रधान कार्यालय में बैठे कुछ भ्रष्ट अधिकारियों के सहयोग से बहुत कुछ गलत कार्य करने में सक्षम रही है। उदाहरण के तौर पर भर्ती एवं प्रोमोशन नियमों में अनाधिकृत बदलाव (केवल भारत सरकार ही इनमें बदलाव कर सकती है), सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के प्रधान कार्यालय के निर्माण में हुआ घोटाला, बैंक द्वारा की जाने वाली मदों की खरीद-फरोख्त में लंबे समय से चल रहे घोटाले, बैंक में कार्यरत कर्मचारियों को अनावश्यक चार्जशीट करने व सोशल रिस्पांसिबिलिटी स्कीम के तहत किये गए कार्यो में घोटाला कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिससे सपष्ट है कि सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक मैनेजमेंट का आचरण संदिग्ध है। जोशी जी का कहना है कि जब उन्होंने गहराई में जा कर पता किया तो पता लगा कि प्रधान कार्यालय में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का तंत्र एक्टिव है एवं जब कोई भी अधिकारी उनके भ्रष्ट आचरण के खिलाफ आवाज उठाने का प्रयास करता है तो उसकी आवाज को दबा दिया जाता है जिसका उद्घाटन वे निकट भविष्य में करेंगे।


इस भ्रष्ट खेल व नीतियों के परिणामस्वरूप सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक मैनेजमेंट अयोग्य अधिकारियों के हाथों की कठपुतली बनी रही और सत्यम की भांति गलत सालाना लाभ प्रदर्शित कर अपने वजूद को जीवित दिखाते रहे। जोशी जी और पदम सिंह तवंर का कहना है कि वे लंबे समय से लिख रहे हैं कि वित्तीय वर्ष 2018-19 में बैक में लगभग 650 करोड़ की हानि हुई है जबकि बैंक ने आरंभ में ऑडिटर्स के साथ मिलीभगत कर लगभग 2 करोड़ का लाभ दिखाने का प्रयास किया सेन माक्र्स एंड एसोसिएट ने यह सब करने से मना कर दिया तो सेन माक्र्स एंड एसोसिएट जो कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया के द्वारा सेंट्रल ऑडिटर नियुक्तकिया गया था उसको गलत तरीके से हटाकर बैंक प्रबंधन ने एक ऐसे ऑडिटर को नियुक्त किया जो कि सेंट्रल ऑडिटर्स लिस्ट में नहीं था ऑडिटर को बदल कर 83 करोड़ के वित्तीय घाटे के साथ वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की गई।
वास्तव में सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक का जन्म तत्कालीन हरियाणा ग्रामीण बैंक के झूठे आंकड़ों से हुआ। हरियाणा शहरी प्राधिकरण निगम की ओर से विभिन्न शहरों के लिए आमंत्रित आवेदनों के लिए किए गए ऋण के दौरान जो आवेदन फीस प्राप्त हुई थी, उस तमाम राशि को लाभ दर्शा कर आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई। इन स्कीमों में आज भी 6.5 करोड़ के करीब राशि बकाया है।
वर्ष दर वर्ष गलत आंकड़े प्रस्तुत कर सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की मैनेजमेंट समस्त सेवाएं अर्जित करती रही जिसकी आड़ में बैंक के फर्नीचर व स्टेशनरी जैसे अन्य सामान को तय दरों से ज्यादा कीमतों पर क्रय करना, विभिन्न समाचार पत्रों अथवा प्रचार के लिए अनावश्यक अरबों रुपए खर्च कर दिए।


बैंक ने वित्तीय वर्ष 2018-19 की बैलेंस शीट एक लोकल दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित करवाई जिस मैसेर्स टास्की एसोसिएट्स के हस्ताक्षर हैं। (रिपोर्ट साथ संलग्न है)
श्री जोशी ने बताया कि जब उन्होंने वित्त सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार से आर.टी.आई के माध्यम है से वर्ष 2018-19 के लिए अप्रूव्ड ऑडिटर्स की लिस्ट मांगी तो हैरतअंगेज जानकारी सामने आई। टास्की एसोसिएट्स नामक फर्म का नाम न तो केन्द्रीय अंकेक्षक की टीम में शामिल था एवं न ही साधारण अंकेक्षक की टीम में। (आर.टी.आई के माध्यम से प्राप्त लिस्ट संलग्न है)

श्री जोशी ने आगे बताया कि जब उन्होंनें समाचार पत्र में प्रकाशित बैलेंस शीट का अध्ययन किया तो पता चला कि यह बैलेंस शीट री-ऑडिटिड बैलेंस शीट के तौर पर प्रकाशित की गई है। अत: मूल बैलेंस शीट का प्रकाशन ही नहीं करवाया गया एवं न ही बैंक की वेबसाइट पर डाला गया। मैनेजमेंट. का यह संदिग्ध व्यवहार जिसमें गलत आंकड़ों को प्रदर्शित किया गया है साथ लगे पत्र में दर्शाया गया है। वास्तविक रिपोर्ट के मुताबिक बैंक ने दर्शाये गए अनार्जक ऋण से संबंधित ब्याज को आर.बी.आई नियमों के मुताबिक नहीं दिखाया है। और जब ऑडिटर्स की टीम ने इससे संबंधित आंकड़े मांगे तो बैंक मैनेजमेंट ने आंकड़े बताने से इंकार कर दिया जिसकी वजह से ऑडिटर्स ने अपनी टिप्पणी संलग्न कर दी एवं बैंक को री-ऑडिट करवानी पड़ी। बैंक मैनेजमेंट यह आंकड़े किसी भी सूरत में नहीं दिखा रही है। जो कर्मचारी उस भ्रष्ट तंत्र का हिस्सा हैं उनको फ्राड के मामलों में भी बचाया जा रहा है जबकि कर्मचारी को अकारण ही चार्ज शीट किया जा रहा है।


टास्की एसोसिएट्स ने भी क्लीन आंकड़ों के साथ हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने 654 में से केवल 20 ब्रांचो का ऑडिट किया एवं अन्य ब्रांचों के लिए सिस्टम से एन.पी.ए मार्क करते हुए अपनी स्तुति दी। उन 20 ब्रांचों के री-ऑडिटिड आंकड़ों से भी यह.सपष्ट हो जाएगा कि कितना एन.पी.ए छुपाया गया। और यदि समस्त बैंक में आर.बी.आई के दिशानिर्देशों के अनुसार सिस्टम से ऑटोमेटिक एन.पी.ए की प्रणाली लागू की जाए तो यह आंकड़ा बैंक मैनेजमेंट की पोल खोलने के लिए पर्याप्त होगा।
मुकेश जोशी और पदम सिंह तवंर ने प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री व रिजर्व बैंक से अपील करते हुए कहा है कि सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के मामलों की सी.बी.आई जांच करवाई जाए एवं असल दोषियों को सजा दिलवाई जाए

 

Post Author: SAURABH BHARDWAJ

मशहूर पत्रकार सौरभ भारद्वाज पिछले लगभग दो दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। हिंदुस्तान, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों में प्रतिष्ठित पदों पर काम करने के बाद श्री भारद्वाज अब वीओएफ मीडिया के समूह संपादक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता श्री भारद्वाज अनेक सामाजिक संगठनों के साथ भी जुड़े हैं।

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