पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट ने दी पालीवाल को अग्रिम जमानत

धोखाधड़ी का आरोप

चंडीगढ़ः पानीपत के जाने-माने एक्सपोर्टर अभिजात पालीवाल और उनके पिता अजय पालीवाल को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने धोखाधड़ी के मामले में अग्रिम जमानत दे दी है और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार करने पर रोक लगा दी है। अदालत ने मामले की आगे सुनवाई की तिथि आठ अगस्त को मुकर्रर की है।

अभिजात की पत्नी और कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता की बेटी अस्मिता ने उस पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। इन दोनों का विवाह मई 2006 में हुआ था और 2015 से ये दोनों अलग रहने लगे। पालीवाल पिता-पुत्र की वकील तनु बेदी ने जस्टिस संढवालिया की बेंच के सामने अपने तर्क रखते हुए कहा कि यह विवाद पति-पत्नी का नहीं बल्कि कारोबार पर अपना वर्चस्व बनाए रखने का है। उनके मुवक्किल पर क्रूरता के झूठे आरोप लगाए गए हैं।

अदालत ने पिछली छह जून को अपने आदेश में पालीवाल को गिरफ्तारी से राहत दी है और उनसे जांच में मदद देने को कहा है। पालीवाल की वकील तनु बेदी ने अदालत में बताया कि विवाह के बाद पति-पत्नी ने मिलकर अपना व्यवसाय अच्छी तरह से चलाना शुरू किया लेकिन बाद में उनके दांपत्य जीवन में इतनी कटुता आ गई कि दोनों 22 दिसंबर 2015 में अलग हो गए। अस्मिता ने अपने पति के खिलाफ गुरूग्राम पुलिस स्टेशन में 1 जुलाई 2017 को आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दायर की। इसमें दस वर्षों में करोड़ो रुपए की हेराफेरी का भी आरोप था। लेकिन इस मामले में पालीवाल को अग्रिम जमानत मिल गई। इसके बाद फिर से वर्तमान एफआईआर पानीपत में दाखिल की गयी जिसमें उस पर धारा 403 405, 409, 415, 418, 420, 463, 465, 471 और 120 बी के तहत आरोप लगाए गए।

परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से दूसरा एफआईआर

सुश्री बेदी ने कहा कि यह दूसरा एफआईआर दरअसल पालीवाल और उसके परिवार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से ही किया गया है। पहले मामले में जमानत मिल जाने के बाद इस एफआईआर के पीछे का मकसद साफ है जिसे पानीपत के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश समझ नहीं पाए और उन्होंने अग्रिम जमानत की याचिका खारिज कर दी।

बेदी ने कहा कि यह मामला विशुद्ध रूप से वित्तीय है और कारोबार-व्यवसाय पर अधिकार जमाने की कोशिश है। यह मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्युनल में लंबित है जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त जज जीएस सिंघवी एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किए गए हैं। इसलिए इन परिस्थितियों में यह एफआईआर वित्तीय मामले को आपराधिक मामले में बदलने का गुप्त प्रयास (cloak and dagger) है। इन तर्कों के बाद अदालत ने उपरोक्त फैसला सुनाया।

यह मामला काफी चर्चित हुआ। पानीपत की पुलिस ने गत 23 मई को अभिजात पालीवाल को चांदनी बाग थाने में पूछताछ के बहाने नौ घंटे बिठाए रखा। बाद में उन्हें एक लाख रुपए के निजी मुचलके पर छोड़ा गया था। इसके बाद उन्होंने पहले अतिरिक्त जिला जज और फिर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिसमें यह आदेश मिला है। पालीवाल को नौ घंटे थाने में रखने का मामला भी गरमाया और पानीपत के निर्यातकों ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के सामने यह मामला रखा। निर्यातकों ने कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने झूठा मामला लाद कर पालीवाल पिता-पुत्र को फंसाया है।

अस्मिता कांग्रेस के नेता जनार्दन द्विवेदी की बेटी

अभिजात की मां विजय लक्ष्मी ने मंत्री को बताया कि कांग्रेस के नेता जनार्दन द्विवेदी ने अपनी लड़की अस्मिता का विवाह मेरे लड़के से करवाया। उस समय उन्होंने बहुत सी बातें छुपाईं। हमने शादी में कोई दहेज वगैरह नहीं लिया। बाद में जनार्दन जी ने मेरे बेटे को अलग करवाकर अभि-अस्मि नाम की कंपनी शुरू करवाई और अस्मिता को 50 प्रतिशत शेयर गिफ्ट करवा दिया धीरे-धीरे। अजय पालीवाल ने अपनी दो प्रॉपर्टी बैंक सिक्योरिटी के तौर पर दी थी और अभि-अस्मी के एनपीए हो जाने के बाद बैंक अब उनके घर की संपत्ति पर कब्जा लेते जा रहे हैं।

अस्मिता को तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उसका कुछ भी नहीं लगा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्मिता का खर्च बहुत ज्यादा था और उसके कारण कंपनी पर कर्ज बढ़ता चला गया। अजय पालीवाल ने कर्ज की गारंटी दी थी इसलिए उनकी दो कंपनियों पर एनपीए हो गया। उन्होंने कहा कि जब अस्मिता खुद आफिस में बैठती थीं तो धोखाधड़ी कैसे हुआ? मना करने के बावजूद यह कंपनी आरंभ की गई जिससे यह कर्ज में डूब गई। उन्होंने कहा कि हमारे पास पूरे दस्तावेज हैं जिन्हें हम पुलिस और अदालत में देंगे।

Post Author: VOF Media

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