आज दिया जाएगा ढलते सूर्य को अर्घ्य

34  साल बाद एक महासंयोग

नई दिल्ली: नहाय खाय के साथ शुरू हुए छठ पर्व के दूसरे दिन खरना हुआ। इसमें दिनभर व्रत रखने के बाद बुधवार रात को व्रतियों ने छठी मैया को प्रसाद अर्पित करने के बाद प्रसाद में गुड़ से बनी खीर, रोटी और फल का सेवन किया। साथ ही प्रसाद को आस-पड़ोस के लोगों में बांटा। अब व्रती शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने तक निर्जला व्रत पर रहेंगी।

चार दिन चलने वाला छठ पर्व दिवाली के बाद आता है। यह व्रत बहुत कठिन माना जाता है। इस बार का छठ पर्व कई मायनो में खास है क्योंकि 34  साल बाद एक महासंयोग बन रहा है। इस बार पूजा के पहले दिन सूर्य का रवियोग बन रहा है। शास्त्रों में कहा गया है कि रवियोग में छठ पूजा शुरू होने से सूर्यदेव भक्तों की हर मनोकामना पूरी करते हैं। यदि कोई व्यक्ति सूर्य से पीड़ित है या उसकी सूर्य की दशा खराब चल रही हो, तो सूर्य की पूजा करने से सभी तरह की परेशानियां खत्म हो जाती हैं।

 हिंदू धर्म के देवताओं में सूर्य ऐसे देवता हैं जिन्हें मूर्त रूप में देखा जा सकता है। सूर्य की शक्तियों का मुख्य श्रोत उनकी पत्नी ऊषा और प्रत्यूषा हैं। छठ में सूर्य के साथ-साथ दोनों शक्तियों की संयुक्त आराधना होती है। प्रात:काल में सूर्य की पहली किरण (ऊषा) और सायंकाल में सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) को अघ्र्य देकर दोनों का नमन किया जाता है।

Post Author: Veethika Bhardwaj

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *